Wednesday, February 27, 2019

पाकिस्तान से नहीं चलेगी समझौता एक्सप्रेस

भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव का असर दोनों देशों के बीच चलने वाली ट्रेन सेवा पर पड़ा है.

सप्ताह में दो बार लाहौर से दिल्ली आने वाली समझौता एक्सप्रेस ट्रेन को फ़िलहाल रोक दिया गया है.

पाक्स्तान सरकार ने इसकी पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच तनाव के कारण फिलहाल अस्थाई रूप से समझौता एक्सप्रेस को रोक दिया गया है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है, "गुरुवार को ट्रेन नहीं चलेगी. भारत और पाकिस्तान के बीच सुरक्षा स्थिति बेहतर होने पर ट्रेन फिर से चलने लगी."

बीबीसी संवाददाता साजिद इक़बाल ने ट्वीट किया है कि ट्रेन सेवा अस्थायी तौर पर रोकी गई है और दोस्ती बस सेवा का भविष्य भी स्पष्ट नहीं है.

बीबीसी के सहयोगी रविंद्र सिंह रॉबिन ने बताया है कि लाहौर के स्टेशन मास्टर ने कहा है कि अगला आदेश ना मिलने तक लाहौर से समझौता एक्सप्रेस नहीं चलेगी.

उनका कहना है कि ट्रेन रद्द होने के कारण लाहौर से भारत आने वाले कई यात्री लाहौर रेलवे स्टेशन में फंस गए हैं. वहीं भारत में पड़ने वाले अटारी में भी कई यात्री फंस गए हैं.

रॉबिन का कहना है कि लाहौर में फंसे यात्रियों को उम्मीद है कि भारत उनके लौटने के लिए जल्द उचित व्यवस्था कराएगा.

हालांकि ट्रेन रोकने का आदेश किस तरफ़ से आया है और क्यों, इस बारे में अब तक कोई पुख़्ता जानकारी नहीं है.

रॉबिन ने भारत और पाकिस्तान दोनों तरफ़ से स्टेशन अधिकारियों से बात की है. वो बताते हैं कि दोनों ही तरफ़ से अधिकारी इसके लिए सीमा पार के अधिकारियों को दोषी बता रहे हैं.

भारत ने ट्रेन रोकने से किया इनकार
अटारी रेलवे स्टेशन मास्टर एके गुप्ता कहते हैं कि यहां पर स्थिति सामान्य है.

उनका कहना है, "गुरुवार को दिल्ली से अटारी पहुंचने वाली समझौता एक्सप्रेस अपने सही समय पर अटारी पहुंची है. लेकिन सवेरे हमें वाघा सीमा से जानकारी मिली है कि दूसरी तरफ़ से समझौता एक्सप्रेस किसी कारण से कैंसल कर दी गई है."

"इस ट्रेन में क़रीब 40 यात्री पाकिस्तान से हैं. अब यहां से सड़क के रास्ते पाकिस्तान भेजने के लिए व्यवस्था की जा रही है. आदेश मिलने पर तुरंत पालन किया जाएगा."

बुधवार को इस संबंध में रेलमंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि समझौता एक्सप्रेस दिल्ली के अटारी तक सामान्य तौर पर जाएगी.

बुधवार को आंध्र प्रदेश के लिए नए रेलवे जोन की घोषणा के दौरा पूछे गए एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, "समझौता एक्सप्रेस का संचालन रोके जाने के बारे में किसी तरह के आधिकारिक निर्देश नहीं मिले हैं."

समझौता एक्सप्रेस भारत और पाकिस्तान के बीच शिमला समझौते के बाद जून, 1976 में शुरू की गई थी.

साल 2001 में संसद पर हमले के बाद यह ट्रेन सेवा रोक दी गई थी लेकिन 2004 में इसे फिर शुरू किया गया.

पुलवामा में सीआरपीएफ़ के क़ाफ़िले पर हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव के बाद अब समझौता एक्सप्रेस रोके जाने की ख़बरें आ रही है.

Friday, February 15, 2019

游走于中国和乌克兰的跨国“红娘”梅爱偲和他的神秘客户

2001年中国河北小伙梅爱偲高考失利后辗转到乌克兰留学。近年他因在中国互联网上分享跨国婚姻生活一炮而红,成为百万人关注的网红。他又把互联网时代的网红福利套现,抓住中国目前单身潮和经济腾飞带来的红利,利用自己的名气和号召力,成立跨国婚恋平台,为中国神秘男性中产介绍乌克兰女朋友:左手输出着传统中国男人的价值观,右手在婚恋俱乐部男会员手里寻觅各类商机。这位当年在高考输在人生起跑线上的普通中国青年在乌克兰实现人生大逆转,不仅娶得外表靓丽的乌克兰老婆,育有混血宝宝,而住上了3000平米别墅。

除了这个跨国婚恋平台,梅爱偲说他更多是一名外贸商人,人生的第一桶金就是做进出口贸易攒下的。但通过这个平台,他陪中国的中高产会员“哥们”吃吃喝喝,约约会,找一个“美女”女朋友,打通不同资源平台的关节; 在一回生二回熟的觥筹交错中,他又可盘活婚恋平台俱乐部里中国中高产男会员手中握着的不同产业资源为己所用。

18年前梅爱偲高考320分失利后选择出国留学。那一年18岁的他以为即将踏上的陌生国度乌克兰是远在非洲的某个贫瘠国家,没想到命运的转折就发生在这个他眼里“全是美女”的国度。

今年38岁的他与妻子达莎相遇时,她只有16岁, 而梅爱偲已经28岁。2年后,二人结婚。一年半后,女儿“小狐狸”出生。

在男权主导的中国社会,漂亮老婆或者女朋友多多少少是男性炫耀的一部分。 尽管中国丈夫和外国妻子的搭配甚是少见,而娶到美丽的外国妻子更在一定程度上为中国男性的面子增光添彩。香港浸会大学讲师杜先致认为,这是“中国帝国主义”的体现。中国的有钱人要在全球范围内展现他们的能力,而他们认为自己能征服外国女性,也是一种力量的体现。杜先致认为,征服外国女性,为中国男性带来成就感。

乌克兰危机:俄罗斯的道理何在?
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邂逅乌克兰“美女”的神秘中国男会员
梅爱偲将妻子达莎的比基尼照片设置为自己在中国社交平台微博的主页照。主页的正中是梅爱偲的相机镜头照片。他将妻子和女儿的日常照放上社交平台微博和微信朋友圈后,不知不觉中在中国的互联网积攒百万粉丝并成为网红。他常与妻子的微博号互动,晒晒甜蜜,晒晒乌克兰湖光水色和碧海蓝天的田园生活。

他也曾是中国搜索引擎百度人物栏的搜索名人。如果在百度搜索关键词乌克兰,在相关人物一栏显示的搜索结果排名第一的是“屌丝逆袭典范”梅爱偲,而俄罗斯总统普京排在他之后。梅爱偲在中国的社交网络上似乎为看客们勾勒出一份唾手可得的美好生活:高考失利却能在海外逆转人生,迎娶小自己12岁的外国金发碧眼的年轻妻子,坐拥3000平米的别墅,还育有混血宝宝。微博网友们不仅关注他的生活动态,还在2年前开始提议梅爱偲为他们介绍外国女朋友,随后自然而然地有了梅爱偲现在30人团队的“优爱乌克兰”交友平台。

这个团队在乌克兰当地招募女会员,也在当地举办大型相亲晚宴和其它活动。还为中国的男会员培训如何与外国女生约会,比如教中国男生第一次约会要穿西装,要为女生开车门,送女生鲜花等等。目前已有40对男女配对成功,确立恋爱关系。

在所有梅爱偲提供的视频中几乎看不到中国男会员的面孔。只见视频里乌克兰女孩在宴会上身着晚礼服婀娜多姿地走下酒店宴会厅的楼梯,有时她们对着镜头抛着媚眼,献着飞吻。

他解释说,和男会员签有保密协议要对其身份保密,也因为很多男会员回国后不想(让别人)知道自己是通过何种渠道和活动认识未来的女友。有的人甚至还会说是在乌克兰出差时邂逅的“美女”。

杜先致分析说,梅爱偲的生意之所以成功,是向同类人贩卖自己的成功故事,粉丝们同样想成为别人羡慕的对象。跨境寻妻,也是他们增长的经济实力和社会地位的体现。

Friday, February 8, 2019

विदर्भ ने सौराष्ट्र को 78 रन से हराया, लगातार दो बार खिताब जीतने वाली छठी टीम

विदर्भ ने गुरुवार को रणजी ट्रॉफी फाइनल में सौराष्ट्र को 78 रन से हरा दिया। उसने लगातार दूसरे साल इस टूर्नामेंट का फाइनल जीता। वह लगातार दो रणजी ट्रॉफी फाइनल जीतने वाली छठी टीम बन गई है। इससे पहले मुंबई, महाराष्ट्र, कर्नाटक, दिल्ली, राजस्थान लगातार दो-दो बार रणजी ट्रॉफी का खिताब जीत चुके हैं।

तीसरी बार फाइनल में हारी सौराष्ट्र की टीम
सौराष्ट्र की टीम तीसरी बार फाइनल में पहुंचने के बाद चैम्पियन बनने से चूक गई। इससे पहले वह 2012-13 और 2015-16 में भी रणजी ट्रॉफी का फाइनल खेल चुकी है। उसे दोनों बार मुंबई से हार का सामना करना पड़ा था।

आदित्य सरवटे ने बीएस चंद्रशेखर की बराबरी की
रणजी ट्रॉफी फाइनल में 41 साल बाद किसी गेंदबाज ने दोनों पारियों में पांच या उससे ज्यादा विकेट लिए। इससे पहले 1977/78 में बीएस चंद्रशेखर ने दोनों पारियों में यह उपलब्धि अपने नाम की थी।

उस समय बीएस चंद्रशेखर ने कर्नाटक की ओर से खेलते हुए फाइनल में उत्तर प्रदेश के खिलाफ पहली पारी में 57 और दूसरी पारी में 24 रन देकर 6-6 विकेट अपने नाम किए थे। कर्नाटक ने वह मैच एक पारी और 193 रन से जीता था।

उनसे पहले जेबी खोट (1941/42), सीएस नायडू, पीके शिवलकर (1972/73), एएम इस्माइल (1975/76) भी ऐसा कारनामा कर चुके हैं। सीएस नायडू तीन बार (1942/43,1944/45, 1945/46) यह उपलब्धि अपने नाम कर चुके हैं।

विदर्भ को इस मैच में जीत के लिए चौथे और आखिरी दिन गुरुवार को पांच विकेट की जरुरत थी। वहीं, सौराष्ट्र को पहली बार चैम्पियन बनने के लिए 148 रन चाहिए थे।

सौराष्ट्र को जीत के लिए 206 रन का लक्ष्य मिला था, लेकिन बुधवार का खेल खत्म होने के समय उसका स्कोर पांच विकेट पर 58 रन था। चौथे दिन उसके आखिरी पांच बल्लेबाज महज 69 रन ही जोड़ पाए।

विदर्भ क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए इस मैच में विदर्भ ने टॉस जीता और बल्लेबाजी का फैसला किया। उसने अक्षय वाडेकर के 45 और अक्षय कार्नेवार के नाबाद 73 रन के दम पर पहली पारी में 312 रन बनाए।

सौराष्ट्र की पहली पारी 307 रन पर ऑलआउट हुई। उसकी ओर से विकेटकीपर स्नेल पटेल (102) ने शतक लगाया। वहीं, जयदेव उनादकट ने 46 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली।

विदर्भ के आदित्य सरवटे ने 98 रन देकर पांच और अक्षय वाखरे ने 80 रन देकर चार खिलाड़ियों को आउट किया। पहली पारी के आधार पर विदर्भ 5 रन की ही बढ़त हासिल कर पाया।

विदर्भ ने दूसरी पारी में 92.5 ओवर में 10 विकेट पर 200 रन बनाए। उसकी ओर से आदित्य सरवटे ने सबसे ज्यादा 49 रन बनाए। मोहित काले ने 38 और गणेश सतीश ने 35 रन बनाए।

सौराष्ट्र की ओर से धर्मेंद्र सिंह जडेजा ने 96 रन देकर 6 विकेट हासिल किए। कमलेश मकवाना ने दो, जबकि जयदेव उनादकट और चेतन साकरिया ने एक-एक खिलाड़ियों को पवेलियन भेजा।

इस तरह सौराष्ट्र को जीत के लिए 206 रन का लक्ष्य मिला। हालांकि, 59 रन देकर 6 विकेट लेने वाले आदित्य सरवटे ने उसके सपनों पर पानी फेर दिया। सौराष्ट्र की शुरुआत खराब रही।

उसका पहला विकेट 19 रन पर ही गिर गया था। टीम का स्कोर जब 55 रन था तब तक सौराष्ट्र की आधी टीम पवेलियन लौट चुकी थी। उसके सात बल्लेबाज दहाई के अंक तक नहीं पहुंच पाए।

सौराष्ट्र के लिए विश्वराज जडेजा ने सबसे ज्यादा 52 रन बनाए। पहली पारी के शतकवीर स्नेल पटेल 12 रन ही बना पाए। इनके अलावा कमलेश मकवाना (14) और धर्मेंद्र सिंह जडेजा (17) ही दहाई के अंक तक पहुंच पाए।