शुक्रवार 30 जनवरी 1948 की शुरुआत एक आम दिन की तरह हुई. हमेशा की तरह महात्मा गांधी तड़के साढ़े तीन बजे उठे.
प्रार्थना की, दो घंटे अपनी डेस्क पर कांग्रेस की नई ज़िम्मेदारियों के मसौदे पर काम किया और इससे पहले कि दूसरे लोग उठ पाते, छह बजे फिर सोने चले गए.
काम करने के दौरान वह अपनी सहयोगियों आभा और मनु का बनाया नींबू और शहद का गरम पेय और मीठा नींबू पानी पीते रहे. दोबारा सोकर आठ बजे उठे.
दिन के अख़बारों पर नज़र दौड़ाई और फिर ब्रजकृष्ण ने तेल से उनकी मालिश की. नहाने के बाद उन्होंने बकरी का दूध, उबली सब्ज़ियां, टमाटर और मूली खाई और संतरे का रस भी पिया.
शहर के दूसरे कोने में पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के वेटिंग रूम में नाथूराम गोडसे, नारायण आप्टे और विष्णु करकरे अब भी गहरी नींद में थे.
पटेल से क्यों मिलने वाले थे गांधी?
डरबन के उनके पुराने साथी रुस्तम सोराबजी सपरिवार गांधी से मिलने आए. इसके बाद रोज़ की तरह वह दिल्ली के मुस्लिम नेताओं से मिले. उनसे बोले, ''मैं आप लोगों की सहमति के बग़ैर वर्धा नहीं जा सकता.''
गांधी जी के नज़दीकी सुधीर घोष और उनके सचिव प्यारेलाल ने नेहरू और पटेल के बीच मतभेदों पर लंदन टाइम्स में छपी एक टिप्पणी पर उनकी राय मांगी.
इस पर गांधी ने कहा कि वह यह मामला पटेल के सामने उठाएंगे, जो चार बजे उनसे मिलने आ रहे हैं और फिर वह नेहरू से भी बात करेंगे जिनसे शाम सात बजे उनकी मुलाक़ात तय थी.
उधर, बिरला हाउस के लिए निकलने से पहले नाथूराम गोडसे ने कहा कि उनका मूंगफली खाने को जी चाह रहा है. आप्टे उनके लिए मूंगफली ढूंढने निकले लेकिन थोड़ी देर बाद आकर बोले- ''पूरी दिल्ली में कहीं भी मूंगफली नहीं मिल रही. क्या काजू या बादाम से काम चलेगा?''
गोडसे को सिर्फ़ मूंगफली चाहिए थी
लेकिन गोडसे को सिर्फ़ मूंगफली ही चाहिए थी. आप्टे फिर बाहर निकले और इस बार मूंगफली का बड़ा लिफ़ाफ़ा लेकर वापस लौटे. गोडसे मूंगफलियों पर टूट पड़े. तभी आप्टे ने कहा कि अब चलने का समय हो गया है.
चार बजे वल्लभभाई पटेल अपनी पुत्री मनीबेन के साथ गांधी से मिलने पहुंचे और प्रार्थना के समय यानी शाम पांच बजे के बाद तक उनसे मंत्रणा करते रहे.
सवा चार बजे गोडसे और उनके साथियों ने कनॉट प्लेस के लिए एक तांगा किया. वहां से फिर उन्होंने दूसरा तांगा किया और बिरला हाउस से दो सौ गज पहले उतर गए.
उधर पटेल के साथ बातचीत के दौरान गांधी चरखा चलाते रहे और आभा का परोसा शाम का खाना बकरी का दूध, कच्ची गाजर, उबली सब्ज़ियां और तीन संतरे खाते रहे.
आभा को मालूम था कि गांधी को प्रार्थना सभा में देरी से पहुँचना बिल्कुल पसंद नहीं था. वह परेशान हुई, पटेल को टोकने की उनकी हिम्मत नहीं हुई, आख़िरकार वह भारत के लौह पुरुष थे. उनकी यह भी हिम्मत नहीं हुई कि वह गांधी को याद दिला सकें कि उन्हें देर हो रही है.
जब सभा के लिए निकले गांधी
बहरहाल उन्होंने गांधी की जेब घड़ी उठाई और धीरे से हिलाकर गांधी को याद दिलाने की कोशिश की कि उन्हें देर हो रही है.
अंतत: मणिबेन ने हस्तक्षेप किया और गांधी जब प्रार्थना सभा में जाने के लिए उठे तो पांच बज कर 10 मिनट होने को आए थे.
गांधी ने तुरंत अपनी चप्पल पहनी और अपना बायां हाथ मनु और दायां हाथ आभा के कंधे पर डालकर सभा की ओर बढ़ निकले. रास्ते में उन्होंने आभा से मज़ाक किया.
गाजरों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज तुमने मुझे मवेशियों का खाना दिया. आभा ने जवाब दिया, ''लेकिन बा इसको घोड़े का खाना कहा करती थीं.'' गांधी बोले, ''मेरी दरियादिली देखिए कि मैं उसका आनंद उठा रहा हूँ जिसकी कोई परवाह नहीं करता.''
आभा हँसी लेकिन उलाहना देने से भी नहीं चूकीं, ''आज आपकी घड़ी सोच रही होगी कि उसको नज़रअंदाज़ किया जा रहा है.''
Wednesday, January 30, 2019
Tuesday, January 22, 2019
विवेचनाः 'मुग़ल-ए-आज़म' के असली शहंशाह थे के. आसिफ़
पचास के दशक में बनी फ़िल्म 'मुग़ल-ए-आज़म' को बनाने के लिए जिस पागलपन, कल्पनाशीलता और जीवट की ज़रूरत थी, वो के. आसिफ़ में कूट-कूट कर भरी हुई थी.
हमेशा चुटकी से सिगरेट या सिगार की राख झाड़ने वाले करीमउद्दीन आसिफ़, अभिनेता नज़ीर के भतीजे थे.
शुरू में नज़ीर ने उन्हें फ़िल्मों से जोड़ने की कोशिश की लेकिन आसिफ़ का वहाँ दिल न लगा.
नज़ीर ने उनके लिए दर्ज़ी की एक दुकान खुलवा दी.
थोड़े दिनों में ही वो दुकान बंद करवानी पड़ी, क्योंकि ये देखा गया कि आसिफ़ का अधिकतर समय पड़ोस के एक दर्ज़ी की लड़की से रोमांस करने में बीत रहा था.
मुग़ल-ए-आज़म' का जादू अब भी बरक़रार
के. आसिफ़ ने अपने जीवन में सिर्फ़ दो फ़िल्मों का निर्देशन किया, 1944 में आई 'फूल' और फिर 'मुग़ल-ए-आज़म.'
लेकिन इसके बावजूद उनका नाम भारतीय फ़िल्म इतिहास में हमेशा स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा.
हाल में आई किताब 'ये उन दिनों की बात है' के लेखक यासिर अब्बासी बताते हैं, "मुग़ल-ए-आज़म मैं कम से कम 100 बार देख चुका हूँ."
"लेकिन आज भी जब वो टीवी पर आती है, तो मैं चैनल 'चेंज' नहीं कर पाता हूँ."
"कमाल का 'विज़न' और 'पैशन' था आसिफ़ में. सिर्फ़ दो फ़िल्म करने के बावजूद आसिफ़ को चोटी के निर्देशकों की क़तार में रखा जाता है."
यूँ तो 'मुग़ल-ए-आज़म' का हर पक्ष मज़बूत है, लेकिन इस फ़िल्म को दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी इसके संवादों ने.
यासिर अब्बासी बताते हैं कि अनारकली को ज़िंदा चुनवाए जाने से पहले का दृश्य था, जिसमें अकबर उनसे उनकी आख़िरी इच्छा पूछते हैं और वो कहती हैं कि वो एक दिन के लिए भारत की मलका-ए-आज़म बनना चाहती हैं.
आसिफ़ ने अपने तीनों संवाद में लेखकों से पूछा कि इस पर अनारकली को क्या कहना चाहिए. अमानउल्लाह साहब जो कि ज़ीनत अमान के पिता थे और एहसान रिज़वी ने अपने लिखे डायलॉग सुनाए. इसके बाद आसिफ़ साहब ने वजाहत मिर्ज़ा की तरफ़ देखा."
"वजाहत मिर्ज़ा ने अपने मुंह से पान की पीक उगालदान में डाल कर कहा, 'ये सब 'डायलॉग' बकवास हैं. इतने शब्दों की ज़रूरत क्या है?"
"उन्होंने फिर अपने पानदान से एक पर्चा निकाल कर पढ़ा, अनारकली सिर्फ़ सलाम करेगी और सिर्फ़ ये कहेगी कि 'शहंशाह की इन बेहिसाब बख़शीशों के बदले में ये कनीज़ जलालउद्दीन मोहम्मद अकबर को अपना ये ख़ून माफ़ करती है."
"मिर्ज़ा का ये कहना था कि आसिफ़ ने दौड़ कर उन्हें गले लगा लिया और वहाँ मौजूद दोनों डायलॉग लेखकों ने अपने कागज़ फाड़ कर फेंक दिए."
जब 'मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो' गाना फ़िल्माया जा रहा था तो पहले आसिफ़ और फिर नृत्य निर्देशक लच्छू महाराज नौशाद के पास आ कर बोले, "नौशाद साहब ये गाना ऐसा बनाएं कि वाजिद अली शाह के दरबार के ज़माने की ठुमरी और दादरा याद आ जाए."
"नौशाद ने कहा कि कथक नृत्य में चेहरे और हाथ के भाव सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. इसे फ़िल्म में मधुबाला पर फ़िल्माया जाएगा. लेकिन क्या वो इसके साथ न्याय कर पाएंगी, क्योंकि वो कत्थक नृत्यागना तो हैं नहीं?"
"लच्छू महाराज ने कहा, ये आप मेरे ऊपर छोड़ दीजिए. उन्होंने शूटिंग से पहले मधुबाला से नृत्य का घंटों अभ्यास कराया. पूरा गाना उन पर फ़िल्माया गया और किसी 'डुप्लीकेट' का इस्तेमाल नहीं किया गया."
हमेशा चुटकी से सिगरेट या सिगार की राख झाड़ने वाले करीमउद्दीन आसिफ़, अभिनेता नज़ीर के भतीजे थे.
शुरू में नज़ीर ने उन्हें फ़िल्मों से जोड़ने की कोशिश की लेकिन आसिफ़ का वहाँ दिल न लगा.
नज़ीर ने उनके लिए दर्ज़ी की एक दुकान खुलवा दी.
थोड़े दिनों में ही वो दुकान बंद करवानी पड़ी, क्योंकि ये देखा गया कि आसिफ़ का अधिकतर समय पड़ोस के एक दर्ज़ी की लड़की से रोमांस करने में बीत रहा था.
मुग़ल-ए-आज़म' का जादू अब भी बरक़रार
के. आसिफ़ ने अपने जीवन में सिर्फ़ दो फ़िल्मों का निर्देशन किया, 1944 में आई 'फूल' और फिर 'मुग़ल-ए-आज़म.'
लेकिन इसके बावजूद उनका नाम भारतीय फ़िल्म इतिहास में हमेशा स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा.
हाल में आई किताब 'ये उन दिनों की बात है' के लेखक यासिर अब्बासी बताते हैं, "मुग़ल-ए-आज़म मैं कम से कम 100 बार देख चुका हूँ."
"लेकिन आज भी जब वो टीवी पर आती है, तो मैं चैनल 'चेंज' नहीं कर पाता हूँ."
"कमाल का 'विज़न' और 'पैशन' था आसिफ़ में. सिर्फ़ दो फ़िल्म करने के बावजूद आसिफ़ को चोटी के निर्देशकों की क़तार में रखा जाता है."
यूँ तो 'मुग़ल-ए-आज़म' का हर पक्ष मज़बूत है, लेकिन इस फ़िल्म को दर्शकों के बीच लोकप्रिय बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई थी इसके संवादों ने.
यासिर अब्बासी बताते हैं कि अनारकली को ज़िंदा चुनवाए जाने से पहले का दृश्य था, जिसमें अकबर उनसे उनकी आख़िरी इच्छा पूछते हैं और वो कहती हैं कि वो एक दिन के लिए भारत की मलका-ए-आज़म बनना चाहती हैं.
आसिफ़ ने अपने तीनों संवाद में लेखकों से पूछा कि इस पर अनारकली को क्या कहना चाहिए. अमानउल्लाह साहब जो कि ज़ीनत अमान के पिता थे और एहसान रिज़वी ने अपने लिखे डायलॉग सुनाए. इसके बाद आसिफ़ साहब ने वजाहत मिर्ज़ा की तरफ़ देखा."
"वजाहत मिर्ज़ा ने अपने मुंह से पान की पीक उगालदान में डाल कर कहा, 'ये सब 'डायलॉग' बकवास हैं. इतने शब्दों की ज़रूरत क्या है?"
"उन्होंने फिर अपने पानदान से एक पर्चा निकाल कर पढ़ा, अनारकली सिर्फ़ सलाम करेगी और सिर्फ़ ये कहेगी कि 'शहंशाह की इन बेहिसाब बख़शीशों के बदले में ये कनीज़ जलालउद्दीन मोहम्मद अकबर को अपना ये ख़ून माफ़ करती है."
"मिर्ज़ा का ये कहना था कि आसिफ़ ने दौड़ कर उन्हें गले लगा लिया और वहाँ मौजूद दोनों डायलॉग लेखकों ने अपने कागज़ फाड़ कर फेंक दिए."
जब 'मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो' गाना फ़िल्माया जा रहा था तो पहले आसिफ़ और फिर नृत्य निर्देशक लच्छू महाराज नौशाद के पास आ कर बोले, "नौशाद साहब ये गाना ऐसा बनाएं कि वाजिद अली शाह के दरबार के ज़माने की ठुमरी और दादरा याद आ जाए."
"नौशाद ने कहा कि कथक नृत्य में चेहरे और हाथ के भाव सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. इसे फ़िल्म में मधुबाला पर फ़िल्माया जाएगा. लेकिन क्या वो इसके साथ न्याय कर पाएंगी, क्योंकि वो कत्थक नृत्यागना तो हैं नहीं?"
"लच्छू महाराज ने कहा, ये आप मेरे ऊपर छोड़ दीजिए. उन्होंने शूटिंग से पहले मधुबाला से नृत्य का घंटों अभ्यास कराया. पूरा गाना उन पर फ़िल्माया गया और किसी 'डुप्लीकेट' का इस्तेमाल नहीं किया गया."
Friday, January 18, 2019
चैट का स्क्रीनशॉट वायरल, इसमें कलेक्टर ने डिप्टी से कहा- भाजपा को जिताओ, एसडीएम का चार्ज मिलेगा
सोशल मीडिया पर दो महिला अफसरों के बीच व्हाट्सएप पर हुई बातचीत वायरल हो रही है। ये बातचीत विधानसभा चुनाव के दौरान हुई बताई जा रही है। इस चैट को शहडोल कलेक्टर अनुभा श्रीवास्तव और डिप्टी कलेक्टर पूजा तिवारी के बीच हुई बातचीत का स्क्रीनशॉट बताया जा रहा है। इसमें अनुभा कांग्रेस को हराने और भाजपा को जिताने की बात कह रही हैं।
इस चैट के वायरल होने के बाद डिप्टी कलेक्टर पूजा तिवारी ने शहडोल कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने कहा, 'इस चैट की जांच हो। क्योंकि, यह मुझे और कलेक्टर मैम को बदनाम करने की साजिश है। ये चैट कहां से वायरल हुई, मुझे कुछ नहीं पता।' इसमें डिप्टी कलेक्टर को भाजपा सरकार बनने पर एसडीएम का चार्ज देने की बात भी कही गई है।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले पर कहा कि जो भी वायरल हो रहा है। वह अफसरों की कार्यशैली का हिस्सा नहीं है। मामले की जांच होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मैम दो सेक्टर में सिचुएशन कंट्रोल है, लेकिन जैतपुर की नहीं हो पा रही। कांग्रेस लीड बना रही है एंड उमा धुर्वे के समर्थक काफी हैं।
कलेक्टर: मुझे कांग्रेस क्लीन स्वीप चाहिए। मैं आरओ डेहरिया को फोन कर देती हूं। पूजा तुम्हे एसडीएम का चार्ज लेना है तो जैतपुर में बीजेपी को विन कराओ।
डिप्टी कलेक्टर: ओके मैम मैं मैनेज करती हूं, बट कोई इन्क्वायरी तो नहीं होगी।
कलेक्टर: मैं हूं। मेहनत कर रही हो तो भाजपा गवर्नमेंट बनते ही तुम्हे एसडीएम का चार्ज मिलेगा।
मोबाइल की भी हो रही जांच
डिप्टी कलेक्टर पूजा तिवारी के मोबाइल की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता किया जा सके कि कहीं उनके मोबाइल और नंबर के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं की है।
ऑनलाइन एजुकेशन स्टार्टअप कंपनी बाइजू (BYJU) ने यूएस बेस्ड फर्म ओस्मो को 850 करोड़ रुपए (12 करोड़ डॉलर) में खरीद लिया है। बाइजू ने गुरुवार को यह जानकारी दी। ओस्मो खेल के दौरान बच्चों को सिखाने के सिस्टम तैयार करती है। यह डिजिटल के दौर में बच्चों को खिलौनों से जोड़ने पर फोकस करती है।
ओस्मो की टीम में बदलाव नहीं होगा
ओस्मो अलग ब्रांड बना रहेगा। बाइजू इसकी फिजिकल-टू-डिजिटल टेक्नोलॉजी और कंटेंट का इस्तेमाल करेगी। ओस्मो के सीईओ और को-फाउंडर प्रमोद शर्मा और उनकी टीम काम करती रहेगी।
बाइजू का कहना है कि ओस्मो को खरीदने से उसकी अंतरराष्ट्रीय योजना मजबूत होगी। वह बच्चों को सिखाने के ज्यादा बेहतर और रोचक तरीके उपलब्ध करवाने पर जोर देगी। बाइजू का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विस्तार करने की योजना है। कंपनी टेक्नोलॉजी के जरिए लर्निंग पर बड़े निवेश करती रहेगी।
बाइजू की शुरुआत 3 साल पहले 2015 में हुई थी। यह ऐप के जरिए तीसरी से 12वीं कक्षा तक के छात्रों को एजुकेशन सर्विस देती है। इससे 3 करोड़ छात्र जुड़े हुए हैं। इनमें से 20 लाख ने सालाना पेड सब्सक्रिप्शन ले रखा है।
इस चैट के वायरल होने के बाद डिप्टी कलेक्टर पूजा तिवारी ने शहडोल कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने कहा, 'इस चैट की जांच हो। क्योंकि, यह मुझे और कलेक्टर मैम को बदनाम करने की साजिश है। ये चैट कहां से वायरल हुई, मुझे कुछ नहीं पता।' इसमें डिप्टी कलेक्टर को भाजपा सरकार बनने पर एसडीएम का चार्ज देने की बात भी कही गई है।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस मामले पर कहा कि जो भी वायरल हो रहा है। वह अफसरों की कार्यशैली का हिस्सा नहीं है। मामले की जांच होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मैम दो सेक्टर में सिचुएशन कंट्रोल है, लेकिन जैतपुर की नहीं हो पा रही। कांग्रेस लीड बना रही है एंड उमा धुर्वे के समर्थक काफी हैं।
कलेक्टर: मुझे कांग्रेस क्लीन स्वीप चाहिए। मैं आरओ डेहरिया को फोन कर देती हूं। पूजा तुम्हे एसडीएम का चार्ज लेना है तो जैतपुर में बीजेपी को विन कराओ।
डिप्टी कलेक्टर: ओके मैम मैं मैनेज करती हूं, बट कोई इन्क्वायरी तो नहीं होगी।
कलेक्टर: मैं हूं। मेहनत कर रही हो तो भाजपा गवर्नमेंट बनते ही तुम्हे एसडीएम का चार्ज मिलेगा।
मोबाइल की भी हो रही जांच
डिप्टी कलेक्टर पूजा तिवारी के मोबाइल की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता किया जा सके कि कहीं उनके मोबाइल और नंबर के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ तो नहीं की है।
ऑनलाइन एजुकेशन स्टार्टअप कंपनी बाइजू (BYJU) ने यूएस बेस्ड फर्म ओस्मो को 850 करोड़ रुपए (12 करोड़ डॉलर) में खरीद लिया है। बाइजू ने गुरुवार को यह जानकारी दी। ओस्मो खेल के दौरान बच्चों को सिखाने के सिस्टम तैयार करती है। यह डिजिटल के दौर में बच्चों को खिलौनों से जोड़ने पर फोकस करती है।
ओस्मो की टीम में बदलाव नहीं होगा
ओस्मो अलग ब्रांड बना रहेगा। बाइजू इसकी फिजिकल-टू-डिजिटल टेक्नोलॉजी और कंटेंट का इस्तेमाल करेगी। ओस्मो के सीईओ और को-फाउंडर प्रमोद शर्मा और उनकी टीम काम करती रहेगी।
बाइजू का कहना है कि ओस्मो को खरीदने से उसकी अंतरराष्ट्रीय योजना मजबूत होगी। वह बच्चों को सिखाने के ज्यादा बेहतर और रोचक तरीके उपलब्ध करवाने पर जोर देगी। बाइजू का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से विस्तार करने की योजना है। कंपनी टेक्नोलॉजी के जरिए लर्निंग पर बड़े निवेश करती रहेगी।
बाइजू की शुरुआत 3 साल पहले 2015 में हुई थी। यह ऐप के जरिए तीसरी से 12वीं कक्षा तक के छात्रों को एजुकेशन सर्विस देती है। इससे 3 करोड़ छात्र जुड़े हुए हैं। इनमें से 20 लाख ने सालाना पेड सब्सक्रिप्शन ले रखा है।
Thursday, January 10, 2019
MP: बीच सड़क लड़की से छेड़छाड़, चांटा मारा, बनाया अश्लील वीडियो
मध्य प्रदेश के दमोह में कुछ दरिदों ने एक लड़की के साथ अश्लील हरकत की और छेड़खानी का वीडियो भी बनाया. हालांकि, यह बदमाश पुलिस की गिरफ्त से अभी बाहर हैं. यह वीडियो इतना शर्मनाक है कि इसे बिना एडिट किए नहीं देखा जा सकता और ना ही इसकी भाषा को जैसा का तैसा सुना सकते हैं.
वीडियो में दरिंदे लड़की के कपड़े उतारने की कोशिश करते नजर आए और पीड़ित लड़की दरिंदों से रहम की भीख मांगती दिखी. इस दौरान लड़की के साथ मौजूद लड़के ने भी बार-बार माफी मांगी लेकिन बदमाशों ने उसकी एक न सुनी और लड़के की पिटाई कर दी. इसके बाद उन्होंने लड़की का अश्लील वीडियो बनाकर उसे वायरल कर दिया. लड़का और लड़की प्रेमी-प्रेमिका बताए जा रहे हैं.
वीडियो में गुलाबी रंग की टी शर्ट पहने लड़के ने पहले लड़की को चांटा मारा इसके बाद लड़की के साथ मौजूद लड़के पर हाथ उठाया. फिर इसी दरिंदे ने लड़की के कपड़े उतारने की भी कोशिश की. इस वीडियो में 3 से 4 लोग दिख रहे हैं, लेकिन सबके चेहरे या तो साफ नहीं है या फिर ढके हुए हैं.
करीब 1 मिनट के इस वीडियो को बदमाशों ने वायरल कर दिया. वीडियो वायरल होने पर वीएचपी और बीजेपी नेताओं ने दमोह के एसपी से मुलाकात कर बदमाशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. दमोह पुलिस ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर पीड़ित लड़की की पहचान हो गई है. उसके बयान पर आगे की कार्रवाई होगी.
दमोह पुलिस ने उन लोगों को भी चेताया है, जो सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं. पुलिस ने अभी ये साफ नहीं किया है कि ये वीडियो कब बनाया गया और आरोपी कौन हैं.
सिर लेकर थाने पहुंचे परिवार वाले
कांग्रेस ने हरियाणा की जींद विधानसभा सीट के उपचुनाव में पार्टी के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को अपना उम्मीदवार बनाया है. सुरजेवाला इस समय कांग्रेस पार्टी के मीडिया प्रभारी हैं.
पार्टी महासचिव मुकुल वासनिक की ओर से जारी बयान के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सुरजेवाला की उम्मीदवारी को मंजूरी दी है. सुरजेवाला अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के प्रमुख होने के साथ ही वर्तमान में कैथल से विधायक भी हैं.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव से पहले हो रहे जींद उपचुनाव को कांग्रेस नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है, इसलिए अपने एक बड़े चेहरे को मैदान में उतारने का फैसला किया.
गौरतलब है कि जींद सीट से विधायक हरिचंद मिड्ढा के निधन के बाद उपचुनाव हो रहा है. मिड्ढा ने इनेलो के टिकट पर 2014 का चुनाव जीता था. लंबी बीमारी के चलते पिछले साल अगस्त में उनका निधन हो गया था.
वीडियो में दरिंदे लड़की के कपड़े उतारने की कोशिश करते नजर आए और पीड़ित लड़की दरिंदों से रहम की भीख मांगती दिखी. इस दौरान लड़की के साथ मौजूद लड़के ने भी बार-बार माफी मांगी लेकिन बदमाशों ने उसकी एक न सुनी और लड़के की पिटाई कर दी. इसके बाद उन्होंने लड़की का अश्लील वीडियो बनाकर उसे वायरल कर दिया. लड़का और लड़की प्रेमी-प्रेमिका बताए जा रहे हैं.
वीडियो में गुलाबी रंग की टी शर्ट पहने लड़के ने पहले लड़की को चांटा मारा इसके बाद लड़की के साथ मौजूद लड़के पर हाथ उठाया. फिर इसी दरिंदे ने लड़की के कपड़े उतारने की भी कोशिश की. इस वीडियो में 3 से 4 लोग दिख रहे हैं, लेकिन सबके चेहरे या तो साफ नहीं है या फिर ढके हुए हैं.
करीब 1 मिनट के इस वीडियो को बदमाशों ने वायरल कर दिया. वीडियो वायरल होने पर वीएचपी और बीजेपी नेताओं ने दमोह के एसपी से मुलाकात कर बदमाशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. दमोह पुलिस ने बताया कि वायरल वीडियो के आधार पर पीड़ित लड़की की पहचान हो गई है. उसके बयान पर आगे की कार्रवाई होगी.
दमोह पुलिस ने उन लोगों को भी चेताया है, जो सोशल मीडिया पर इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं. पुलिस ने अभी ये साफ नहीं किया है कि ये वीडियो कब बनाया गया और आरोपी कौन हैं.
सिर लेकर थाने पहुंचे परिवार वाले
कांग्रेस ने हरियाणा की जींद विधानसभा सीट के उपचुनाव में पार्टी के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला को अपना उम्मीदवार बनाया है. सुरजेवाला इस समय कांग्रेस पार्टी के मीडिया प्रभारी हैं.
पार्टी महासचिव मुकुल वासनिक की ओर से जारी बयान के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सुरजेवाला की उम्मीदवारी को मंजूरी दी है. सुरजेवाला अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के प्रमुख होने के साथ ही वर्तमान में कैथल से विधायक भी हैं.
पार्टी सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव से पहले हो रहे जींद उपचुनाव को कांग्रेस नेतृत्व ने गंभीरता से लिया है, इसलिए अपने एक बड़े चेहरे को मैदान में उतारने का फैसला किया.
गौरतलब है कि जींद सीट से विधायक हरिचंद मिड्ढा के निधन के बाद उपचुनाव हो रहा है. मिड्ढा ने इनेलो के टिकट पर 2014 का चुनाव जीता था. लंबी बीमारी के चलते पिछले साल अगस्त में उनका निधन हो गया था.
Thursday, January 3, 2019
सीमा पर नापाक करतूत, PAK ने पुंछ में LoC पर दूसरे दिन भी गोलीबारी की
सीमा पर मुंहतोड़ जवाब मिलने के बावजूद पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. वो लगातार सीमा पार से सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है और भारतीय सुरक्षा बलों को निशाना बना रहा है. बुधवार को पाकिस्तानी सैनिकों ने फिर लगातार दूसरे दिन जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा पर अंधाधुंध गोलीबारी की और अग्रिम चौकियों को निशाना बनाया.
अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2018 में अक्टूबर के आखिर तक पाकिस्तान द्वारा सीजफायर उल्लंघन की करीब 1600 घटनाएं हो चुकी हैं, जो अब तक किसी भी साल में हुई सीजफायर की घटनाओं में सबसे ज्यादा है. अधिकारियों ने बताया कि पुंछ जिले के दिगवार सेक्टर में अग्रिम चौकियों पर बुधवार को पाकिस्तानी सैनिकों ने मोर्टार दागे और छोटे हथियारों से गोलीबारी की.
वहीं, भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान को उसकी करतूत का मुंहतोड़ जवाब दिया. फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. मंगलवार को भी पाकिस्तानी सैनिकों ने इसी जिले में खारी करमारा और गुलपुर क्षेत्रों में नियंत्रण रेखा पर छोटे हथियारों से गोलीबारी की थी. अधिकारियों ने बताया कि साल 2003 में हुए संघर्षविराम समझौते का पालन करने और संयम बरतने का बार-बार आह्वान किए जाने के बावजूद पिछले साल अक्टूबर तक नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बिना उकसावे की गोलीबारी की 1591 घटनाएं हुईं.
इससे पहले नए साल पर पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के गुलपुर सेक्टर में नियंत्रण रेखा के नजदीक गोलीबारी की थी और भारतीय चौकियों को निशाना बनाया था. मंगलवार देर रात की गई इस गोलीबारी का भारतीय सुरक्षाबलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया था. एक तरफ जहां पूरी दुनिया नए साल के जश्न में डूबी थी, वहीं पाकिस्तान की इस गोलीबारी के कारण पुंछ सेक्टर के गांव के लोग छिपकर अपने घरों से कैद हो गए थे. वहीं, पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार को नियंत्रण रेखा पर बाघ सेक्टर में एक भारतीय जासूसी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया.
पिछले कुछ महीनों से BSNL देश में अलग-अलग जगहों पर अपने 4G सर्विसेज की टेस्टिंग कर रही है. फिलहाल BSNL के 4G यूजर बेस की संख्या काफी सीमित है. कमर्शियल लॉन्चिंग की बात करें तो इसकी लॉन्चिंग 2019 की पहली छमाही में हो सकती है.
रिसर्चर ने कहा है कि अगर आप फेसबुक ऐप के लिए लोकेशन ऑफ कर लेते हैं फिर भी हर संभावित तरीके से फेसबुक आपकी लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश में लगा रहता है. रिसर्चर ने कहा ऐसा इसलिए है क्योंकि फेसबुक का मॉडल विज्ञापन बेस्ड है और वो इसके लिए यूजर की प्राइवेसी को भी दांव पर लगा सकता है. ऐसा हाल के कुछ लीक और डेटा ब्रीच में भी पाया गया है.
यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैलिफोर्निया के कंप्यूटर साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर ऐलेक्जेंड्रा कोरोलोओ ने मीडियम पर इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है. यहां बताया गया है कि कैसे फेसबुक उनके लोकेशन पर आधारित टार्गेटेड विज्ञापन देता है, जबकि उन्होंने न तो प्रोफाइल में अपनी लोकेशन डीटेल्स डाली है और न ही लोकेशन ऑन किया है. इतना ही नहीं उन्होंने हर तरह संभव प्रयास किए जिससे लोकेशन शेयर न हो.
कोरोलोवा का कहना है कि उन्होंने फेसबुक ऐप में लोकेशन हिस्ट्री भी ऑफ कर लिया था और iOS की सेटिंग्स में भी उन्होने फेसबुक के लिए लोकेशन ऐक्सेस को डिसेबल कर लिया था. इसके अलावा उन्होंने ने अपने शहर और किसी भी तरह के लोकेशन टैग्ड फोटो और कॉन्टेंट फेसबुक प्रोफाइल पर नहीं अपलोड किया. इसे बावजूद लगातार उन्हें उनके घर और दफ्तर के लोकेशन के आधार पर विज्ञापन दिए गए. कोरोलोवा के मुताबिक फेसबुक पर दिया गया लोकेशन कंट्रोल एक भ्रम है और ये असल में ये कंट्रोल है ही नहीं.
अधिकारियों के मुताबिक वर्ष 2018 में अक्टूबर के आखिर तक पाकिस्तान द्वारा सीजफायर उल्लंघन की करीब 1600 घटनाएं हो चुकी हैं, जो अब तक किसी भी साल में हुई सीजफायर की घटनाओं में सबसे ज्यादा है. अधिकारियों ने बताया कि पुंछ जिले के दिगवार सेक्टर में अग्रिम चौकियों पर बुधवार को पाकिस्तानी सैनिकों ने मोर्टार दागे और छोटे हथियारों से गोलीबारी की.
वहीं, भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान को उसकी करतूत का मुंहतोड़ जवाब दिया. फिलहाल किसी के हताहत होने की खबर नहीं है. मंगलवार को भी पाकिस्तानी सैनिकों ने इसी जिले में खारी करमारा और गुलपुर क्षेत्रों में नियंत्रण रेखा पर छोटे हथियारों से गोलीबारी की थी. अधिकारियों ने बताया कि साल 2003 में हुए संघर्षविराम समझौते का पालन करने और संयम बरतने का बार-बार आह्वान किए जाने के बावजूद पिछले साल अक्टूबर तक नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बिना उकसावे की गोलीबारी की 1591 घटनाएं हुईं.
इससे पहले नए साल पर पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के गुलपुर सेक्टर में नियंत्रण रेखा के नजदीक गोलीबारी की थी और भारतीय चौकियों को निशाना बनाया था. मंगलवार देर रात की गई इस गोलीबारी का भारतीय सुरक्षाबलों ने मुंहतोड़ जवाब दिया था. एक तरफ जहां पूरी दुनिया नए साल के जश्न में डूबी थी, वहीं पाकिस्तान की इस गोलीबारी के कारण पुंछ सेक्टर के गांव के लोग छिपकर अपने घरों से कैद हो गए थे. वहीं, पाकिस्तानी सेना ने मंगलवार को नियंत्रण रेखा पर बाघ सेक्टर में एक भारतीय जासूसी ड्रोन को मार गिराने का दावा किया.
पिछले कुछ महीनों से BSNL देश में अलग-अलग जगहों पर अपने 4G सर्विसेज की टेस्टिंग कर रही है. फिलहाल BSNL के 4G यूजर बेस की संख्या काफी सीमित है. कमर्शियल लॉन्चिंग की बात करें तो इसकी लॉन्चिंग 2019 की पहली छमाही में हो सकती है.
रिसर्चर ने कहा है कि अगर आप फेसबुक ऐप के लिए लोकेशन ऑफ कर लेते हैं फिर भी हर संभावित तरीके से फेसबुक आपकी लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश में लगा रहता है. रिसर्चर ने कहा ऐसा इसलिए है क्योंकि फेसबुक का मॉडल विज्ञापन बेस्ड है और वो इसके लिए यूजर की प्राइवेसी को भी दांव पर लगा सकता है. ऐसा हाल के कुछ लीक और डेटा ब्रीच में भी पाया गया है.
यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैलिफोर्निया के कंप्यूटर साइंस के असिस्टेंट प्रोफेसर ऐलेक्जेंड्रा कोरोलोओ ने मीडियम पर इस बारे में विस्तार से जानकारी दी है. यहां बताया गया है कि कैसे फेसबुक उनके लोकेशन पर आधारित टार्गेटेड विज्ञापन देता है, जबकि उन्होंने न तो प्रोफाइल में अपनी लोकेशन डीटेल्स डाली है और न ही लोकेशन ऑन किया है. इतना ही नहीं उन्होंने हर तरह संभव प्रयास किए जिससे लोकेशन शेयर न हो.
कोरोलोवा का कहना है कि उन्होंने फेसबुक ऐप में लोकेशन हिस्ट्री भी ऑफ कर लिया था और iOS की सेटिंग्स में भी उन्होने फेसबुक के लिए लोकेशन ऐक्सेस को डिसेबल कर लिया था. इसके अलावा उन्होंने ने अपने शहर और किसी भी तरह के लोकेशन टैग्ड फोटो और कॉन्टेंट फेसबुक प्रोफाइल पर नहीं अपलोड किया. इसे बावजूद लगातार उन्हें उनके घर और दफ्तर के लोकेशन के आधार पर विज्ञापन दिए गए. कोरोलोवा के मुताबिक फेसबुक पर दिया गया लोकेशन कंट्रोल एक भ्रम है और ये असल में ये कंट्रोल है ही नहीं.
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