Thursday, March 21, 2019

जब नेहरू ने अमरीकी राष्ट्रपति की पत्नी के साथ खेली थी होली

अमरीका के 35वें राष्ट्रपति जॉन एफ. केनेडी की पत्नी जैकलीन 1962 में नौ दिन की भारत यात्रा पर आई थीं. चूँकि ये एक निजी यात्रा थी, इसलिए उन्हें सलाह दी गई कि किसी अमरीकी एयरलाइन के बजाए एयर इंडिया से भारत जाएं. उन्होंने ऐसा ही किया. उन्होंने रोम से दिल्ली के लिए एयर इंडिया की फ़्लाइट ली.

उनके साथ उनकी बहन राजकुमारी ली रैद्ज़ीविल और उनकी आया प्रोवी भी भारत आई थी. भारत आने से पहले ये तीनों पोप से मिलने वेटिकन गई थीं. ली इस बात से थोड़ा नाराज़ थीं कि पोप ने उनसे सिर्फ़ इसलिए मिलने से इनकार कर दिया था क्योंकि उनका तलाक़ हो चुका था जबकि उन्हीं पोप को उनकी आया प्रोवी से मिलने में कोई दिक्कत नहीं हुई जो तीन नाजायज़ बच्चों की माँ थीं.

हाँलाकि ये एक निजी यात्रा थी, लेकिन तब भी भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू पालम हवाई अड्डे पर जैकलीन केनेडी के विमान का इंतज़ार कर रहे थे. विमान पालम के चक्कर पर चक्कर लगाए जा रहा था, लेकिन उतरने का नाम नहीं ले रहा था.

नेहरू ने उस समय अमरीका में भारत के राजदूत बीके नेहरू से कहा कि पता लगाएं कि माजरा क्या है.

बीके नेहरू अपनी आत्मकथा 'नाइस गाइज़ फ़िनिश सेकेंड' में लिखते हैं, "मैंने प्रधानमंत्री को बताया कि जहाज़ के न उतरने का कारण ये है कि जैकलीन ने अपना मेकअप पूरा नहीं किया है. नेहरू को थोड़ा अचरज हुआ और वो थोड़ा मुस्कराए. मैंने उनसे कहा कि अमरीका की इस प्रथम महिला को प्रोटोकॉल वगैरह की परवाह नहीं है. उनके लिए सुंदर दिखना, समय पर पहुंचने से ज़्यादा महत्वपूर्ण है."

बहरहाल जैकलीन उतरीं और नेहरू ने गुलदस्तों से उनका स्वागत किया. पालम से तीनमूर्ति निवास तक के पूरे रास्ते में हज़ारों लोग जैकलीन कैनेडी के स्वागत में सड़कों के दोनों ओर खड़े थे. उनमें बहुत से लोग अपनी बैलगाड़ियों में 'अमरीका की इस महारानी' का दर्शन करने आए थे.

अमरीकी दूतावास पहुंचने के थोड़ी देर बाद भारत में अमरीकी राजदूत केन गालब्रेथ ने बीके नेहरू से कहा कि जैकलीन चाहती हैं कि भारत में वो जहाँ भी जाएं, आप उनके साथ चलें. इस तरह बीके नेहरू अपने ही देश में विदेशी राजदूत के मेहमान के मेहमान बन गए.

जैकलीन की रेलयात्रा

जैकलीन और उनकी बहन ने पहली रात प्रधानमंत्री निवास में बिताई. नेहरू ने उनके सम्मान में ज़बरदस्त भोज दिया. खाना जल्दी ख़त्म हो गया और इन दोनों के पास अपने अपने कमरों में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहा. तभी परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष होमी भाभा ने सलाह दी कि आप हमारे साथ नाचती क्यों नहीं.

जैकलीन की बहन ली तो इसके लिए फ़ौरन तैयार हो गई लेकिन जैकलीन थोड़ा झिझक रही थीं. बीके नेहरू और भाभा ने जैकलीन को उनके कमरे में छोड़ा और ली के साथ उस समय के दिल्ली के बेहतरीन होटल इंपीरियल के 'द टैवर्न' में डांस करने चले गए.

अगले दिन जैकलीन और उनकी बहन ली, केन और किटी गालब्रेथ, बीके नेहरू और विदेश मंत्रालय की एक अधिकारी सूनू कपाडिया जिन्हें जैकलीन का लियाज़ां अफ़सर बनाया गया था, एक विशेष रेलगाड़ी से आगरा के लिए रवाना हुए.

रेलवे बोर्ड ने जैकलीन के लिए भारत में उपलब्ध बेहतरीन रेल सैलून का बंदोबस्त किया था. खाने और वाइन का भी अच्छा प्रबंध था. जैकलीन को ये सब बहुत अच्छा लग रहा था, क्योंकि अमरीका में वो विमान से उड़ने की आदी थी और अर्से बाद वो ट्रेन से सफ़र कर रही थीं. जैकलीन ने फ़तहपुर सीकरी का अकबर का महल और ताज महल देखा. अगले दिन उन्हें विमान से अपनी यात्रा जारी रखनी थी, लेकिन जैकलीन ने इच्छा प्रकट की कि वो यहाँ से वाराणसी जाना चाहेंगी और वो भी ट्रेन से.

नेहरू लिखते हैं, "सूनू मेरे पास दौड़ी दौड़ी आईं और पूछने लगी कि क्या इतने कम नोटिस पर वाराणसी की यात्रा आयोजित की जा सकती है. मैंने रेलवे बोर्ड के चेयरमैन करनैल सिंह को फ़ोन मिलाया. उन्होंने आनन फानन में इसकी व्यवस्था कराई और हम सब लोग ट्रेन से वाराणसी के लिए रवाना हो गए. लेकिन अपने उत्साह में मैं इसके बारे में विदेश मंत्रालय को बताना भूल गया. दिल्ली वापस लौटने पर मुझे इस बात की डांट पिलाई गई कि मैंने अमरीका के राष्ट्रपति की पत्नी की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया है."

वाराणसी से जैकी उदयपुर गईं जहाँ महाराणा के महल में दो रात रुकीं. महल इतना भव्य था कि जैकी ने अपने पति को चिट्ठी लिख कर कहा कि इसके एक विंग में पूरा का पूरा व्हाइट हाउस समा जाएगा.

बीके नेहरू लिखते हैं, "वहीं एक रात जैकी ने कहा कि हम लोग लेक की तरफ़ घूमने चलें. हम लोग वहाँ गए, चाँदनी रात में लेक का नज़ारा लिया और वापस लौट आए. अगले दिन सूनू ने मुझे बताया कि नाश्ते के वक्त हमारे सुरक्षा जवानों ने अमरीकी सुरक्षा जवानों से मज़ाक किया, 'हमारे साहब ने आपकी मेमसाहब को किडनैप कर लिया और आपको पता ही नहीं चला.' शायद हमारे सुरक्षा जवान हम पर दूर से नज़र रख रहे थे."

महल में उस दौरान जैकलीन के अलावा बीकानेर के महाराजा कर्णी सिंह के अलावा अमरीका की एक बहुत सुंदर फ़ोटोग्राफ़र भी ठहरी हुई थी. उदयपुर की महारानी ने जैकलीन कैनेडी से शिकायत की कि उनके पति का इस फ़ोटोग्राफ़र से चक्कर चल रहा है. आप इस मामले में मेरी मदद करें.

नेहरू लिखते हैं कि जैकलीन ने उस फ़ोटोग्राफ़र को बुला कर खूब झाड़ लगाई और उसके कैमरे को खोल कर उस महिला द्वारा खींची गई सारी फ़िल्म को एक्सपोज़ कर दिया. ज़ाहिर था वो भारतीय जनता द्वारा उन्हें दिए गए 'अमरीकी महारानी' के ख़िताब को बहुत गंभीरता से ले रही थीं.'

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